मेरी हर धरकन की है यही पुकार |
तूँ मेरे जीवन में बनकर आयी रिमझिम फुहार |
तुम बिन कैसे बने संगीत मेरा?
तुम ही तो हो मेरे वीणा की तार |
लेखक का परिचय: आशीष कुमार सत्यार्थी "शब्दों के माध्यम से भावनाओं को जीवंत करना ही मेरी कला है।" नमस्ते, मैं आशीष कुमार सत्यार्थ...
No comments:
Post a Comment