Tuesday, March 17, 2026

लेखक का परिचय

 लेखक का परिचय: आशीष कुमार सत्यार्थी

​"शब्दों के माध्यम से भावनाओं को जीवंत करना ही मेरी कला है।"

​नमस्ते, मैं आशीष कुमार सत्यार्थी हूँ—एक लेखक, कवि और विचारक। मेरा साहित्यिक सफर मानव मन की गहरी संवेदनाओं, दार्शनिक चिंतन और जीवन के अनछुए पहलुओं को शब्दों में पिरोने की एक कोशिश है।

​मेरी लेखनी के मुख्य स्तंभ:

​कविता और शायरी: मैं मुख्य रूप से हिंदी कविता और शायरी के माध्यम से अपने भाव व्यक्त करता हूँ। मेरी रचनाएँ अक्सर प्रेम, विरह, दर्शन और समाज के प्रतिबिंब को दर्शाती हैं।

​दार्शनिक दृष्टिकोण: मेरा मानना है कि हर शब्द के पीछे एक कहानी और हर कहानी के पीछे एक गहरा अनुभव छिपा होता है।

​डिजिटल उपस्थिति: 'Satyarthi' ब्लॉग के माध्यम से मैं अपनी मौलिक कृतियों को दुनिया भर के साहित्य प्रेमियों के साथ साझा करता हूँ।

​मैं निरंतर नई रचनाओं के साथ अपने पाठकों से जुड़ने का प्रयास करता हूँ। यदि आप साहित्य और कला में रुचि रखते हैं, तो इस ब्लॉग के माध्यम से हम साथ जुड़ सक


ते हैं।

Friday, October 17, 2025

 आप जरुरी हैं किसी के लिए ये वहम है ,

जबतक आपसे जरुरत है, आपको महत्वपूर्ण बताना होता है |

बदल लेते हैं लोग अक्सर रास्ते,वक़्त के साथ,

सूखे डाल पर कहाँ किसी परिंदे का ठिकाना होता है |

                                            ✍️आशीष कुमार सत्यार्थी 

Thursday, September 25, 2025

 झुक जाए जो शीश वो संघर्ष के काबिल नहीं |

कट जाए भी गर शीश संघर्ष के राहों पर तो अमरत्व समझा जायेगा |

Sunday, May 26, 2024

 


उठा है जो तूफ़ाँ तो फ़िर आसमां तलक जायेगा |
ऊँची पहाड़ी पर चढ़ कर फ़िर उस ढलान तलक जायेगा |
पथरीला रास्ता है और सफर बहुत लम्बा है |
सोच कर बता तूँ कहाँ तलक जायेगा |

✍️आशीष कुमार सत्यार्थी 

Tuesday, February 6, 2024

 बनाकर हर परिंदे को उड़ने के काबिल,

घोंसला अक्सर विरान रहा जाता है |

है नियति का खेल सब, विधि का है मेल सब |

जीवन का यह जो धारा है, उड़े बिना भी न गुजारा है |

गम कई चुपचाप सह जाता है |

बनाकर हर परिंदे को उड़ने के काबिल,

घोंसला अक्सर विरान रहा जाता है |


                  ✍️आशीष कुमार सत्यार्थी 

Monday, November 28, 2022

फुटपाथ

 


कभी जूता कभी चप्पल कभी सैंडल का मार खाता हूँ |

सह कर हजारों गम सबको मंजिल तक पहुंचता हूँ |

लिख दो मेरी पहचान, मै फुटपाथ कहलाता हूँ |


किसी ने मेरे ऊपर कुछ दुकान सजाया है |

कुछ बेघरों ने मुझे आशियाना बनाया है |

गिर जाए कोई सड़क पर उसको खुद पे बिठाता हूँ |

लिख दो मेरी पहचान, मै फुटपाथ कहलाता हूँ |


कहने को तो हमेशा मै व्यस्त कहलाता हूँ |

खुद के मन की बात अक्सर खुद को ही सुनाता हूँ |

खभी ईंटो कभी पत्थर कभी बालू सा बिखर जाता हूँ |

लिख दो मेरी पहचान, मै फुटपाथ कहलाता हूँ |


                           ✍️आशीष कुमार सत्यार्थी

Saturday, November 19, 2022

क्यों मौन है तूँ



क्यों मौन है तूँ, क्यों गौन है तूँ?

पर खोल जमाना देखेगा |

दे रंग हुनर को अपने तुम,

तेरे संग जमाना देखेगा |

ग़र खो गई तेरी आभा तो,

फिर क्या जमाना देखेगा?

शुलों पे चल, पत्थर पिघला,

दे आकार जमाना देखेगा |

लहरा दे जहाँ में पचम तूँ,

तेरा उमंग जमाना देखेगा |


                  ✍️आशीष कुमार सत्यार्थी 

लेखक का परिचय

 लेखक का परिचय: आशीष कुमार सत्यार्थी ​"शब्दों के माध्यम से भावनाओं को जीवंत करना ही मेरी कला है।" ​नमस्ते, मैं आशीष कुमार सत्यार्थ...