Saturday, November 19, 2022

क्यों मौन है तूँ



क्यों मौन है तूँ, क्यों गौन है तूँ?

पर खोल जमाना देखेगा |

दे रंग हुनर को अपने तुम,

तेरे संग जमाना देखेगा |

ग़र खो गई तेरी आभा तो,

फिर क्या जमाना देखेगा?

शुलों पे चल, पत्थर पिघला,

दे आकार जमाना देखेगा |

लहरा दे जहाँ में पचम तूँ,

तेरा उमंग जमाना देखेगा |


                  ✍️आशीष कुमार सत्यार्थी 

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