Saturday, October 30, 2021


पलकें हैं भींगी और आँखें है नम||


होटों पे खुशी और दिल मे है गम |

यूँ तो हर किसी को खुशियाँ बांटने का प्रयत्न करता हूँ|

पर अक्सर अकेले मे उदास रहते है हम।

पलकें है भींगी और आँखे हैं नम||


न कोई गुल है न गुलशन है मेरा,

माँ-बाप ही तो गगन है मेरा ,

पर अक्सर उनसे दूर रहकर गमगीन है हम।

पलकें हैं भींगी और आँखे हैं नम।


Thursday, October 28, 2021

 खैरियत न पूछे कोई हमारी अभी |

कर रहा हूँ सब्र की सवारी अभी |

उम्मीदों के दिये से करेंगे रौशन जहाँ को |

थोड़ी कठिन दौर में चल रही है जीवन की गाड़ी अभी |

 मेरी हर धरकन की है यही पुकार |

तूँ मेरे जीवन में बनकर आयी रिमझिम फुहार |

तुम बिन कैसे बने संगीत मेरा?

तुम ही तो हो मेरे वीणा की तार |

लेखक का परिचय

 लेखक का परिचय: आशीष कुमार सत्यार्थी ​"शब्दों के माध्यम से भावनाओं को जीवंत करना ही मेरी कला है।" ​नमस्ते, मैं आशीष कुमार सत्यार्थ...