Thursday, April 9, 2020

ग़र दिल में है तमन्ना मंजिल पाने की, 
ज़िंदगी में कुछ कर दिखाने की|
पत्थर चीर कर भी रास्ता बन सकता है, 
ग़र साहस हो खुद को आजमाने की |

✍️आशीष कुमार सत्यार्थी 

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लेखक का परिचय

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