Thursday, April 9, 2020

ग़र दिल में है तमन्ना मंजिल पाने की, 
ज़िंदगी में कुछ कर दिखाने की|
पत्थर चीर कर भी रास्ता बन सकता है, 
ग़र साहस हो खुद को आजमाने की |

✍️आशीष कुमार सत्यार्थी 

Sunday, April 5, 2020


किया रौशन, घर आंगन|
जलाकर दीपक हमने आज |
जीत निश्चित हमारी है,
हुआ है जश्न-ए -आगाज़ |
न उत्स्व था न दिवाली,
फिर भी चमक उठा, सारा देश आज |

✍️आशीष कुमार सत्यार्थी


ग़म-ए-मुहब्बत बहुत कुछ सिखा जाती है|
उम्मीदों के जलते दिया भी बुझा जाती है |
ग़र हो इतवार अपने मुस्कान पर, 
एक बार किसी बेवफा से मुहब्बत करके देखो |
खिलते ग़ुलाब को भी रुला जाती है |

✍️आशीष कुमार सत्यार्थी 

लेखक का परिचय

 लेखक का परिचय: आशीष कुमार सत्यार्थी ​"शब्दों के माध्यम से भावनाओं को जीवंत करना ही मेरी कला है।" ​नमस्ते, मैं आशीष कुमार सत्यार्थ...